हरियाणा कृषि संबंधित कुछ सवाल श्रीमती किरण चौधरी द्वारा राज्यसभा में उठाए।

हरियाणा
श्रीमती किरण चौधरी

राज्यसभा की सांसद श्रीमती किरण चौधरी ने हाल ही में सदन में हरियाणा में कृषि से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठाए। श्रीमती किरण चौधरी के सवाल उनके सवालों का जवाब कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने केसे दिया। आये जानते हें इस ब्लॉग के सहायता से |

    1. क्या सरकार ने हरियाणा में धान की खेती के लिए अत्यधिक जल उपयोग के कारण भूजल और मृदा क्षरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया है?

    2. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत हरियाणा के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में दलहन, तिलहन और बागवानी की ओर फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

  1. क्या हरियाणा के किसानों को सूक्ष्म सिंचाई, जैविक खेती और जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, और इसके क्या मापनीय परिणाम प्राप्त हुए हैं?

क्या था ? कृषि मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर का जवाब

  1. भूजल संसाधनों का अनुमान

केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) और राज्य सरकारें मिलकर हरियाणा में भूजल संसाधनों का वार्षिक मूल्यांकन करती हैं। 2024 के नवीनतम अनुमान के अनुसार:

  • हरियाणा में वार्षिक निष्कर्षण योग्य भूजल संसाधन 9.36 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है।

  • सभी उपयोगों के लिए कुल भूजल निष्कर्षण 12.72 बीसीएम है, जिसमें से 11.47 बीसीएम (90%) सिंचाई, विशेष रूप से धान की खेती, के लिए उपयोग होता है।

  • भूजल निष्कर्षण का चरण 135.96% है, जो दर्शाता है कि भूजल का उपयोग उपलब्ध संसाधनों से अधिक हो रहा है।

2.फसल विविधीकरण के लिए कुछ मुख्य कदम

  • फसल विविधीकरण कार्यक्रम (सीडीपी): यह कार्यक्रम 2013-14 से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लागू है, जिसका उद्देश्य धान जैसे जल-गहन फसलों के क्षेत्र को तिलहन, दलहन, मोटे अनाज, पोषक अनाज और कपास जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर मोड़ना है। 2013-14 से 2024-25 तक हरियाणा में 1.93 लाख हेक्टेयर में वैकल्पिक फसलों का प्रदर्शन किया गया है।

  • एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच): हरियाणा के सभी जिलों में लागू इस योजना के तहत फल, सब्जियाँ, मसाले, बागानी फसलें और फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। 2014-15 से 2024-25 तक:

    • 662.16 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की गई।

    • 1.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को विभिन्न हस्तक्षेपों के तहत कवर किया गया, जिसमें 2,000 हेक्टेयर जैविक बागवानी खेती शामिल है।

3. आधुनिक तकनीकी और वित्तीय सहायता के लिए

  • परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई): यह योजना क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण से जैविक खेती को बढ़ावा देती है। हरियाणा में 25 क्लस्टरों के लिए 1.04 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई है।

  • प्रति बूंद अधिक फसल (पीडीएमसी): यह योजना सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों (ड्रिप और स्प्रिंकलर) के माध्यम से जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है। 2015-16 से 2021-22 तक पीएमकेएसवाई के हिस्से के रूप में और 2022-23 से पीएम-आरकेवीवाई के तहत लागू की जा रही है। अब तक:

    • 479.89 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई।

    • 1.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के तहत कवर किया गया।

  • जलवायु-अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (एनआईसीआरए): आईसीएआर उन्नत प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग के माध्यम से भारतीय कृषि की जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति लचीलापन बढ़ाने के लिए एक प्रमुख नेटवर्क परियोजना ‘जलवायु-अनुकूल कृषि में राष्ट्रीय नवाचार (एनआईसीआरए)’ का कार्यान्वयन कर रहा है। यह परियोजना हरियाणा के 5 जिलों में क्रियान्वित की जा रही है।

  • सिंचाई मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी के प्रयासों : सिंचाई मंत्री का नतीजा है की बीती मध्यरात्रि टांगरी नदी में जलस्तर 9.5 फुट (लगभग 20,900 क्यूसिक) तक पहुंच गया था, जो खतरे के निशान 7.0 फुट (15,400 क्यूसेक) से अधिक है।
  • पिछले वर्षों में इतनी मात्रा में पानी आने पर अंबाला छावनी की कई कॉलोनियां जलमग्न हो जाती थीं और करोड़ों रुपये का नुकसान होता था, लेकिन समय रहते खुदाई होने से और विभाग की सूझबूझ से खतरा टल गया।
  • श्रीमती श्रुति चौधरी ने इस बार खुद इस चीज की मॉनिटरिंग करी और इस बार सिंचाई विभाग ने बरसात से पहले नदी की खुदाई का कार्य शुरू किया, जिसकी वजह से पानी सुरक्षित रूप से बह गया और हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली
  • आमजन की सुविधा हमारी पहली प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी।:
  • जलभराव की वजह से जनता को हो रही परेशानी पर सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने की अधिकारियों की खिंचाई, श्रुति चौधरी ने कहा किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी और किसकी लापरवाही से जलभराव हुआ और जलभराव की वजह से जनता को समस्या आई उसकी रिपोर्ट दें ताकि उसके खिलाफ एक्शन लिया जाए। श्रुति चौधरी ने कहा की मुझे इसका स्थाई समाधान चाहिए न की लीपापौती, इसके लिए उन्होंने अधिकारियों की खूब खिंचाई की

 

निष्कर्ष

श्रीमती किरण चौधरी के सवालों के जवाब में सरकार ने हरियाणा में भूजल प्रबंधन, फसल विविधीकरण, और जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं और पहलों को लागू करने की जानकारी दी। ये प्रयास हरियाणा के किसानों को टिकाऊ और जल-कुशल खेती की दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।