
बिहार में नतीजों का दिन है और इस बार एनडीए मोदी लहर की वापसी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर जीत हासिल की है। अब यह आकलन हो रहा है कि इस जीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ जैसे अभियानों से पार्टी को मजबूत किया और कार्यकर्ताओं को एक्टिव किया। उन्होंने नमो ऐप के जरिए बीजेपी कार्यकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं से तीन बार सीधा संवाद किया, जिसमें लाखों लोग जुड़े। इससे यह साबित होता है कि एक मजबूत नेता कैसे अपने कार्यकर्ताओं को प्रेरित कर सकता है।
बीजेपी की जीत की एक और वजह कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पीएम मोदी पर किए गए पर्सनल हमले भी रहे। 2019 में ‘चौकीदार चोर है’ जैसे नारों को जनता ने नकार दिया था और बीजेपी को 303 सीटें दी थीं। इसी तरह बिहार में भी राहुल गांधी ने मोदी को ‘वोट चोर’ कहा, जिसका जवाब जनता ने अपने वोट से दिया। यह बात फिर साफ हुई कि जनता प्रधानमंत्री मोदी पर होने वाले व्यक्तिगत हमलों को स्वीकार नहीं करती।
कांग्रेस की हार की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से दूर होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस अब ज्यादा लेफ्ट के प्रभाव में नजर आ रही है, जिसमें अराजकता और लगातार सरकार को घेरने की राजनीति दिखाई देती है। तुष्टीकरण की नीति को भी एक बड़ा वर्ग पसंद नहीं कर रहा, जिसके कारण जनता कांग्रेस से दूर होती जा रही है।
2024 के चुनावों में विरोधियों के नैरेटिव की वजह से बीजेपी 240 सीटों पर रुक गई थी। लेकिन उसके बाद जनता ने जैसे-जैसे स्थितियां देखीं, उन्हें महसूस हुआ कि शायद उन्होंने मैंडेट देने में गलती की। यही वजह है कि 2024 के बाद हरियाणा में बीजेपी की बड़ी जीत हुई और जनता ने अग्निवीर के खिलाफ कांग्रेस के प्रचार को पूरी तरह नकार दिया। इसके बाद महाराष्ट्र में एनडीए की ऐतिहासिक जीत ने माहौल बदल दिया और तीन दशक बाद दिल्ली में भी बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में मतदाताओं ने एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। 11 नवंबर 2025 को हुए इस चरण में कुल 67.14% मतदान दर्ज किया गया, जो पहले चरण के 64.66% से काफी अधिक है। यह आंकड़ा 5:00 बजे तक का है, जब 3.7 करोड़ पात्र मतदाताओं में से करीब 2.30 करोड़ ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
बिहार जैसे राज्य में जहां अक्सर कम मतदान की शिकायत रहती है, यह बंपर वोटिंग राजनीतिक दलों के लिए सुखद संदेश तो है ही, साथ ही कई सवाल भी खड़े कर रही है। क्या यह नीतीश कुमार सरकार के पक्ष में है या महागठबंधन की लहर? इस लेख में हम दूसरे चरण के वोटिंग डेटा को विस्तार से समझेंगे, जिला-वार ब्रेकडाउन देंगे, ऐतिहासिक तुलना करेंगे और SEO-अनुकूलित विश्लेषण के साथ राजनीतिक प्रभाव पर चर्चा करेंगे। अगर आप बिहार चुनाव 2025 के लेटेस्ट अपडेट्स ढूंढ रहे हैं, तो यह गाइड आपके लिए है।
बिहार चुनाव 2025 दूसरे चरण का अवलोकन: क्यों बनी इतनी बड़ी आंधी?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में 20 जिलों की 94 सीटों पर मतदान हुआ। यह चरण किशनगंज से लेकर शिवहर तक फैला था, जहां सीमांचल, कोसी और तिरहुत क्षेत्रों के मतदाता खासी सक्रिय दिखे। कुल पात्र मतदाता 3.7 करोड़ थे, और 5:00 बजे तक 67.14% वोटिंग हो चुकी थी। यह आंकड़ा पहले चरण (6 नवंबर को 64.66%) से 2.48% अधिक है। अनुमान है कि अंतिम आंकड़े 70% को पार कर सकते हैं, क्योंकि कई जगहों पर लाइनें लंबी चल रही थीं।
इस बंपर टर्नआउट के पीछे कई कारण हैं। पहला, महिलाओं की भागीदारी—सोशल मीडिया पर महिलाओं की लंबी कतारों की तस्वीरें वायरल हुईं, जो नीतीश सरकार की योजनाओं (जैसे ₹10,000 की स्कीम) से जुड़ी बताई जा रही हैं। दूसरा, युवा और प्रवासी मजदूरों का जोश—प्रशांत किशोर जैसे स्ट्रैटेजिस्ट ने इन्हें मोबिलाइज करने में भूमिका निभाई।
तीसरा, मौसम का सहयोग—धूप कम होने से सुबह से ही लोग बूथों पर पहुंचे। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वोटिंग एनडीए (बीजेपी-जदयू) के पक्ष में है या महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) की एंटी-इनकंबेंसी लहर? विशेषज्ञों का मानना है कि हाई टर्नआउट अक्सर चेंज की मांग को दर्शाता है, लेकिन बिहार के संदर्भ में यह नीतीश की मजबूती भी दिखा सकता है।
चुनाव आयोग के अनुसार, दोपहर 3:00 बजे तक ही कई जिलों में 60-66% वोटिंग हो चुकी थी, जो 2020 के समान समय के मुकाबले 20% अधिक है। यह ट्रेंड पूरे चरण में बना रहा। अब आइए, जिला-वार डेटा पर नजर डालें, जो बिहार चुनाव 2025 के दूसरे चरण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जिला-वार वोटिंग डेटा: जहां रिकॉर्ड टूटे, वहां आंकड़े
दूसरे चरण में 20 जिलों में मतदान हुआ, जिनमें से 19 में 60% से अधिक टर्नआउट रहा। केवल नवादा में यह 57.11% रहा। नीचे टेबल फॉर्मेट में मुख्य जिलों का डेटा दिया गया है, जो SEO के लिए ऑप्टिमाइज्ड है ताकि सर्च में आसानी से मिले।
| जिला | 3:00 बजे तक मतदान % | 5:00 बजे तक मतदान % | 2020 समान समय तुलना | 2015 कुल टर्नआउट |
|---|---|---|---|---|
| किशनगंज | 66.10% | 76.26% | 47.55% (3:00 बजे) | 64.39% |
| कटिहार | 63.80% | 75.23% | 43.11% (3:00 बजे) | – |
| जमुई | – | 67.81% | – | – |
| पूर्वी चंपारण | >61% | 69.31% | – | – |
| पश्चिमी चंपारण | >61% | 69% | – | – |
| मोतिहारी | >61% | >70% | – | – |
| नवादा | – | 57.11% | – | – |
| पूर्णिया | – | >70% | – | – |
| सुपौल | – | >70% | – | – |
किशनगंज: रिकॉर्ड ब्रेकर जिला

किशनगंज, बिहार, चुनाव 2025 के दूसरे चरण का स्टार रहा। यहां दोपहर 3:00 बजे तक 66.10% वोटिंग हो चुकी थी, जबकि 2020 में समान समय पर केवल 47.55% थी। अंतिम आंकड़े 76.26% पहुंचे, जो 2015 के कुल 64.39% से भी अधिक है। जिले की चार सीटों में किशनगंज (सीट नंबर 54) पर 3:00 बजे 68.13% और 5:00 बजे 78% से अधिक वोट पड़े।
यह सीमांचल क्षेत्र का हिस्सा है, जहां मुस्लिम वोटरों की बड़ी संख्या है। 2020 में यहां दो सीटें AIMIM (ओवैसी की पार्टी) और दो महागठबंधन के पास गई थीं। इस बार हाई टर्नआउट से महागठबंधन को फायदा हो सकता है, लेकिन महिलाओं की भागीदारी नीतीश के पक्ष में देखी जा रही है।
कटिहार: तेज रफ्तार से 75% पार
कटिहार जिले में 11 नवंबर को 3:00 बजे तक 63.80% मतदान हो चुका था, जो 2020 के 43.11% से दोगुना है। 5:00 बजे तक यह 75.23% पहुंच गया। जिले की सात सीटों पर 2020 में बीजेपी को तीन, जदयू को एक और महागठबंधन को तीन मिली थीं। इस बार एनडीए की एकजुटता के दावों के बीच वोटिंग तेज रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीजेपी का गढ़ माना जाता है, लेकिन प्रवासी मजदूरों का वोट तेजस्वी यादव की ओर शिफ्ट हो सकता है।
चंपारण क्षेत्र: बीजेपी का किला, लेकिन चुनौतीपूर्ण टर्नआउट
पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और शिवहर में 3:00 बजे तक 61% से अधिक वोटिंग हुई। 5:00 बजे पूर्वी चंपारण में 69.31%, पश्चिमी में 69%, और मोतिहारी में 70% से ऊपर पहुंच गई। यह क्षेत्र बीजेपी का मजबूत आधार है, जहां से वे महागठबंधन को रोकते हैं। लेकिन इस बार पहली बार दावा किया गया कि महागठबंधन यहां बढ़त ले सकता है। हाई टर्नआउट से एनडीए को फायदा तो है, लेकिन युवा वोटरों की नाराजगी एक फैक्टर बन सकती है।
अन्य जिले: जहां 70% से ऊपर पहुंचा ग्राफ
सीमांचल के पूर्णिया, सुपौल और कटिहार जैसे जिलों में 70% से अधिक वोटिंग हुई। जमुई में 67.81% रहा। केवल नवादा में 57.11% था, जो शायद लॉजिस्टिक इश्यूज या कम जागरूकता से हुआ। कुल मिलाकर, 19 जिलों में 60%+ टर्नआउट ने बिहार को राष्ट्रीय रिकॉर्ड की ओर धकेल दिया।
ऐतिहासिक तुलना: 2015 vs 2020 vs 2025 – क्या बदला?
बिहार चुनाव के इतिहास में दूसरा चरण 2025 का टर्नआउट सबसे ऊंचा है। 2015 में किशनगंज का कुल 64.39% था, जो इस बार 3:00 बजे टूट गया। 2020 में दूसरे चरण का औसत 57-60% था, लेकिन 2025 में यह 67%+ हो गया। कारण? डिजिटल कैंपेनिंग, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें (महिलाओं/पुरुषों की लाइनों वाली), और ₹00 करोड़ की योजनाओं का असर।
पहले चरण में महिलाओं का डेटा न देने पर सवाल उठे, जो ECI की विश्वसनीयता पर उंगली उठाते हैं। 2025 में कुल वोटिंग 65-68% रहने का अनुमान है, जो 2019 लोकसभा के 58% से बेहतर है। यह बदलाव डेमोक्रेसी को मजबूत करता है, लेकिन अफवाहों (जैसे मुकेश सहनी की नाराजगी) ने माहौल गरमा दिया।
राजनीतिक प्रभाव: किसकी छत उड़ेगी, किसकी बचेगी?
यह बंपर वोटिंग किसके लिए? एनडीए दावा कर रहा है कि महिलाओं का वोट नीतीश को जाएगा, जबकि महागठबंधन पुरुष/युवा वोट पर भरोसा कर रहा है। सोशल मीडिया पर सम्राट चौधरी के पोस्टर्स (लालू को कैक्टस दिखाना) ने नफरत फैलाई, लेकिन एकजुटता दिखाने के प्रयास हुए। नीतीश का वीडियो शेयर कर सक्रियता दिखाई गई, हालांकि कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई।
एग्जिट पोल (14 नवंबर को) एनडीए की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन ‘मीडिया’ के आरोप लगे। अगर तेजस्वी जीतते हैं, तो यह 3000 करोड़ की राजनीति के खिलाफ होगा। कुल मिलाकर, हाई टर्नआउट चेंज की भूख दिखाता है—बेरोजगारी और माइग्रेशन पर फोकस बढ़ेगा।
निष्कर्ष: बिहार का भविष्य वोटिंग से तय
बिहार चुनाव 2025 का दूसरा चरण यादगार रहा। 67.14% टर्नआउट ने साबित किया कि जनता उदासीन नहीं, बल्कि जोशपूर्ण है। जिला-वार डेटा से साफ है कि सीमांचल और चंपारण में बदलाव की हवा है। 14 नवंबर के रुझानों का इंतजार रहेगा, लेकिन यह वोटिंग विकास और जवाबदेही की मांग करती है। अगर आप बिहार के मतदाता हैं, तो अपनी आवाज गर्व से उठाएं। ज्यादा अपडेट्स के लिए कमेंट करें!
